Saturday, April 12, 2008


mana aap mohhbat ka ejhar nhi karte eska mtlab ye nhi ki aap hamse pyar nhi karte.

Friday, March 28, 2008


एक लम्हा जो बार बार सताता है
नजाने ये दिल क्या चाहता है...
काश अप होते हुम्हारी नज़रों के सामने
पर ये काश काश ही रह जाता है


अपने
आगाज़ से Aaaj तक ज़िंदगी
तेरी
ही याद मैं गम रही..
फिर भी जाने क्यों यह एहसास है
जैसे चाहत मेरी कम रही

जाम टूटने का बहाना ना कर
हम
तो तेरी आंखो से ही पिलेंगे
तू ना पर आने का बहाना तो कर
हम तो तेरे इन्तजार मेही जिलेंगे.