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एक लम्हा जो बार बार सताता है
नजाने ये दिल क्या चाहता है...
काश अप होते हुम्हारी नज़रों के सामने
पर ये काश काश ही रह जाता है

अपने आगाज़ से Aaaj तक ज़िंदगी
तेरी ही याद मैं गम रही..
फिर भी जाने क्यों यह एहसास है
जैसे चाहत मेरी कम रही

जाम टूटने का बहाना ना कर
हम तो तेरी आंखो से ही पिलेंगे
तू ना आ पर आने का बहाना तो कर
हम तो तेरे इन्तजार मेही जिलेंगे.